शनिवार, 18 मार्च 2023

शादी कर ली ?

 शादियों का मौसम है । एक्टिविस्ट से लेकर इंफ्लुएंसर तक । सब लड्डू खा रहे है । कोई पोस्ट करके लाइक कमा रहा है तो कोई महागठबंधन बना के फोटो खिंचवा रहा है।

शादी राजस्व कमाने का साधन हो चली है । मज़े की बात जिनकी नहीं हुई है वो ज़ोर से लाइक और शेयर दबा रहे हैं ।

शादी एक ऐसा मुकाम बन चली हैं कि  CM तो CM, PM तक भी आशीर्वाद देने से अपने को नहीं रोक पा रहे है ।

समय आगे बढ़ रहा है । कुछ तेजस्वी जोड़े तो 6 या 7 महीने में ही दादा/दादी की डिग्री देने लगे है आजकल । बेचारे इन्शुरेन्स वाले भी हैरान परेशान है । इधर मातृत्व कवर हुआ, उधर क्लेम आ गया । 

9 महीने की जैविक सीमा को इन उत्साही जोड़ो ने धुंधला कर के रख दिया है । चीन को पछाड़ने के लिए युवा वर्ग को तो आगे आना ही पड़ेगा ।

ख़ैर हमे क्या ? 

तो बात चल रही थी शादी की । आप भी शादी कीजिये । अगर हो गयी है या हो नहीं रही है तो सम्मिलित ही हो जाइये । अगर वो भी नहीं तो किसी की जयमाला का वीडियो ही देख लीजिए ।

बात ये है कि जो चल रहा है ना, उसी के साथ चलना ही असली चलना है वर्ना आने वाली पीढ़ी पूछेगी ज़रूर कि जब शादियाँ हो रहीं थी तब आप कर क्या रहे थे ?

सोचिएगा ।


फिर मिलेंगे ।।



पहुँचिये, आप पहुँचवान हैं

 कुछ दिन पहले फुटबॉल का महासंगम निबटा है । भारत की टीम तो खैर समय से ही निबट जाती है । पर चर्चा इस बात की नहीं हुई । 

चर्चित तो वो हुआ जो वहाँ गया । और जो वहाँ गया वो सिर्फ चर्चित ही हुआ क्योंकि न वो 3 में था और न 13 में । फिर भी कुछ लोगों ने इसे भारतीय गर्व का विषय माना । अब लोग मान रहें हैं तो मानने दो । 

फिर यहीं महान फूटबॉलिया वहाँ गया जहाँ भारतीय फ़िल्म अमूमन नहीं पहुँचती हैं । लेकिन इस बार फ़िल्म पहुंची । मज़ेदार बात ये की जो पहुँचा वो फ़िल्म में था ही नहीं और जो था वो पहुँचा पर उसकी चर्चा हुई नहीं ।

कुल मिलाकर बात का भाव ये है कि आपको पहुँचना आना चाहिए । ज़रूरी नहीं कि आप क्यों और कैसे पहुँचे । पहुँचिये, उसी से पहचान है ।

हालाँकि ये कोई स्वस्थ हालात नहीं है लेकिन फिर भी हालात जैसे भी हैं अपने हैं ।

और अपने तो फिर अपने होते हैं ।


फिर मिलेंगे ।


देखो शेर आया

 भारत की राजनीति में आजकल तीन-चार शेर घूम रहे हैं।  एक तो अभी यूरोप घूम कर आया है । जिस दिन संसद में आया, सारे बोले देखो शेर आ गया है अब गीदड़ भाग जाएँगे । अब गीदड़ भागे या वहीं डटे रहे पता चल नहीं पाया है ।

एक दूसरा शेर । उसकी पार्टी बोल रही है कि हमारे शेर को जेल में डाल दिया जबकि हमारा शेर तो पढ़ने-पढ़ाने का शौकीन था । छोटे बच्चे हुआ हुआ करके रो रहे है कि हमे शेर अंकल के दाँत गिनने हैं । अब दाँत गिनेंगे या नहीं पता नहीं ।

तीसरे है बिहार से । उनके लोग बोल रहे हैं कि छापे हमारे शेर को डरा नहीं सकते । हमारा शेर घास नहीं खायेगा । तेजवान शेर है हमारा । अब देखना है कि शेर के पास चारा क्या बचता है ।

2024 आने वाला है । बब्बर शेर सब देख रहा है । किसको घास खिलानी है और किसको रसमलाई, बब्बर शेर सबका हिसाब करेगा। 

ये चुप रहता है और और पाँच साल बाद ही शिकार करता है ।

फिर मिलेंगे ।।

महाकुंभ

  कुम्भ आ गया है। हर 12 साल में आता है। इस बार 144 साल बाद आया है। अच्छी बात है अगर आया है तो स्वागत होना चाहिए।  स्वागत हो भी रहा है। 45 कर...