कुछ दिन पहले फुटबॉल का महासंगम निबटा है । भारत की टीम तो खैर समय से ही निबट जाती है । पर चर्चा इस बात की नहीं हुई ।
चर्चित तो वो हुआ जो वहाँ गया । और जो वहाँ गया वो सिर्फ चर्चित ही हुआ क्योंकि न वो 3 में था और न 13 में । फिर भी कुछ लोगों ने इसे भारतीय गर्व का विषय माना । अब लोग मान रहें हैं तो मानने दो ।
फिर यहीं महान फूटबॉलिया वहाँ गया जहाँ भारतीय फ़िल्म अमूमन नहीं पहुँचती हैं । लेकिन इस बार फ़िल्म पहुंची । मज़ेदार बात ये की जो पहुँचा वो फ़िल्म में था ही नहीं और जो था वो पहुँचा पर उसकी चर्चा हुई नहीं ।
कुल मिलाकर बात का भाव ये है कि आपको पहुँचना आना चाहिए । ज़रूरी नहीं कि आप क्यों और कैसे पहुँचे । पहुँचिये, उसी से पहचान है ।
हालाँकि ये कोई स्वस्थ हालात नहीं है लेकिन फिर भी हालात जैसे भी हैं अपने हैं ।
और अपने तो फिर अपने होते हैं ।
फिर मिलेंगे ।
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