शादियों का मौसम है । एक्टिविस्ट से लेकर इंफ्लुएंसर तक । सब लड्डू खा रहे है । कोई पोस्ट करके लाइक कमा रहा है तो कोई महागठबंधन बना के फोटो खिंचवा रहा है।
शादी राजस्व कमाने का साधन हो चली है । मज़े की बात जिनकी नहीं हुई है वो ज़ोर से लाइक और शेयर दबा रहे हैं ।
शादी एक ऐसा मुकाम बन चली हैं कि CM तो CM, PM तक भी आशीर्वाद देने से अपने को नहीं रोक पा रहे है ।
समय आगे बढ़ रहा है । कुछ तेजस्वी जोड़े तो 6 या 7 महीने में ही दादा/दादी की डिग्री देने लगे है आजकल । बेचारे इन्शुरेन्स वाले भी हैरान परेशान है । इधर मातृत्व कवर हुआ, उधर क्लेम आ गया ।
9 महीने की जैविक सीमा को इन उत्साही जोड़ो ने धुंधला कर के रख दिया है । चीन को पछाड़ने के लिए युवा वर्ग को तो आगे आना ही पड़ेगा ।
ख़ैर हमे क्या ?
तो बात चल रही थी शादी की । आप भी शादी कीजिये । अगर हो गयी है या हो नहीं रही है तो सम्मिलित ही हो जाइये । अगर वो भी नहीं तो किसी की जयमाला का वीडियो ही देख लीजिए ।
बात ये है कि जो चल रहा है ना, उसी के साथ चलना ही असली चलना है वर्ना आने वाली पीढ़ी पूछेगी ज़रूर कि जब शादियाँ हो रहीं थी तब आप कर क्या रहे थे ?
सोचिएगा ।
फिर मिलेंगे ।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें